॥ श्री गणेशाय नमः ॥

·6 min read·By R P Pandey

एकादशी 2027 की पूरी सूची: सभी 25 एकादशी की तारीख़, नाम और तिथि का समय

एकादशी 2027 की पूरी सूची: सफला एकादशी 3 जनवरी से सफला एकादशी 23 दिसंबर तक सभी 25 व्रत, हर एक का नाम, तिथि शुरू और ख़त्म होने का समय, और कहाँ स्मार्त और वैष्णव व्रत अलग दिन हैं।

एकादशी महीने में दो बार आती है, एक शुक्ल पक्ष में और एक कृष्ण पक्ष में। 2027 में कोई अधिक मास नहीं है, फिर भी साल में 25 एकादशी पड़ रही हैं, क्योंकि पौष कृष्ण एकादशी साल की शुरुआत और आख़िर दोनों में आती है।

संक्षेप में: 2027 की पहली एकादशी सफला एकादशी 3 जनवरी को है और आख़िरी सफला एकादशी 23 दिसंबर को। निर्जला एकादशी 14 जून, देवशयनी एकादशी 14 जुलाई और देवउठनी एकादशी 10 नवंबर को है। चातुर्मास 14 जुलाई से 10 नवंबर तक रहेगा।

एकादशी 2027 की सूची

तारीख़एकादशीएकादशी तिथि (जयपुर)ध्यान दें
3 जनवरी 2027, रविवारसफला एकादशी (कृष्ण पक्ष)2 जनवरी, दोपहर 2:25 से शाम 4:09 तक
18 जनवरी 2027, सोमवारपौष पुत्रदा एकादशी (शुक्ल पक्ष)सुबह 10:27 से 19 जनवरी, सुबह 7:50 तकद्वादशी क्षय, व्रत एक दिन पहले
2 फ़रवरी 2027, मंगलवारषटतिला एकादशी (कृष्ण पक्ष)1 फ़रवरी, सुबह 8:42 से सुबह 11:11 तक
17 फ़रवरी 2027, बुधवारजया एकादशी (शुक्ल पक्ष)16 फ़रवरी, रात 8:20 से शाम 5:32 तक
4 मार्च 2027, गुरुवारविजया एकादशी (कृष्ण पक्ष)3 मार्च, सुबह 4:45 से सुबह 7:25 तक
18 मार्च 2027, गुरुवारआमलकी एकादशी (शुक्ल पक्ष)सुबह 4:22 से 19 मार्च, सुबह 1:52 तक
2 अप्रैल 2027, शुक्रवारपापमोचिनी एकादशी (कृष्ण पक्ष)दोपहर 12:46 से 3 अप्रैल, सुबह 2:52 तकक्षय एकादशी, वैष्णव व्रत 3 अप्रैल 2027
17 अप्रैल 2027, शनिवारकामदा एकादशी (शुक्ल पक्ष)16 अप्रैल, सुबह 11:22 से सुबह 9:28 तक
2 मई 2027, रविवारवरूथिनी एकादशी (कृष्ण पक्ष)1 मई, शाम 6:54 से शाम 7:52 तक
16 मई 2027, रविवारमोहिनी एकादशी (शुक्ल पक्ष)15 मई, शाम 6:18 से शाम 5:14 तक
1 जून 2027, मंगलवारअपरा एकादशी (कृष्ण पक्ष)31 मई, सुबह 10:03 से सुबह 9:40 तक
14 जून 2027, सोमवारनिर्जला एकादशी (शुक्ल पक्ष)सुबह 2:13 से 15 जून, सुबह 2:08 तक
30 जून 2027, बुधवारयोगिनी एकादशी (कृष्ण पक्ष)29 जून, रात 10:05 से रात 8:31 तक
14 जुलाई 2027, बुधवारदेवशयनी एकादशी (शुक्ल पक्ष)13 जुलाई, दोपहर 12:09 से दोपहर 1:11 तक
29 जुलाई 2027, गुरुवारकामिका एकादशी (कृष्ण पक्ष)सुबह 7:35 से 30 जुलाई, सुबह 5:13 तकक्षय एकादशी, वैष्णव व्रत 30 जुलाई 2027
12 अगस्त 2027, गुरुवारश्रावण पुत्रदा एकादशी (शुक्ल पक्ष)दोपहर 12:59 से 13 अगस्त, सुबह 3:00 तकक्षय एकादशी, वैष्णव व्रत 13 अगस्त 2027
28 अगस्त 2027, शनिवारअजा एकादशी (कृष्ण पक्ष)27 अगस्त, दोपहर 3:26 से दोपहर 12:43 तक
11 सितंबर 2027, शनिवारपरिवर्तिनी एकादशी (शुक्ल पक्ष)10 सितंबर, शाम 5:01 से शाम 7:37 तक
26 सितंबर 2027, रविवारइंदिरा एकादशी (कृष्ण पक्ष)25 सितंबर, रात 10:31 से शाम 7:50 तक
11 अक्टूबर 2027, सोमवारपापांकुशा एकादशी (शुक्ल पक्ष)10 अक्टूबर, सुबह 11:41 से दोपहर 2:09 तक
25 अक्टूबर 2027, सोमवाररमा एकादशी (कृष्ण पक्ष)सुबह 5:41 से 26 अक्टूबर, सुबह 3:23 तकवैष्णव व्रत 26 अक्टूबर 2027
10 नवंबर 2027, बुधवारदेवउठनी एकादशी (शुक्ल पक्ष)9 नवंबर, सुबह 7:35 से सुबह 9:12 तक
24 नवंबर 2027, बुधवारउत्पन्ना एकादशी (कृष्ण पक्ष)23 नवंबर, दोपहर 1:45 से दोपहर 12:12 तक
9 दिसंबर 2027, गुरुवारमोक्षदा एकादशी (शुक्ल पक्ष)सुबह 2:59 से 10 दिसंबर, सुबह 3:20 तक
23 दिसंबर 2027, गुरुवारसफला एकादशी (कृष्ण पक्ष)22 दिसंबर, रात 11:41 से रात 11:12 तक

तिथि का समय पूरे भारत के लिए एक ही है। व्रत की तारीख़ सूर्योदय के नियम से निकाली गई है, जो नीचे समझाया है।

व्रत की तारीख़ कैसे तय होती है

एकादशी तिथि कभी सुबह शुरू होती है, कभी रात। इसलिए व्रत का दिन तय करने के कुछ नियम हैं।

  1. जिस दिन सूर्योदय के समय एकादशी हो, व्रत उसी दिन रखा जाता है।
  2. अगर एकादशी दो दिन सूर्योदय पर मिले, तो व्रत दूसरे दिन रखा जाता है।
  3. अगर एकादशी किसी भी सूर्योदय को न मिले, तो व्रत उस दिन रखते हैं जिस दिन वह शुरू होती है। इसे क्षय एकादशी कहते हैं।
  4. अगर अगले दिन द्वादशी सूर्योदय पर न मिले, तो व्रत एक दिन पहले रखा जाता है, ताकि पारण द्वादशी में हो सके।

वैष्णव परंपरा में एक नियम और है। अगर व्रत वाले दिन सूर्योदय से 96 मिनट पहले दशमी चल रही हो, तो वैष्णव व्रत अगले दिन रखते हैं। जहाँ ऐसा है, तालिका में "वैष्णव व्रत" के साथ तारीख़ लिखी है।

पारण कब करें

व्रत अगले दिन द्वादशी में खोला जाता है। द्वादशी के पहले चौथाई भाग में पारण नहीं करते, उसे हरि वासर कहते हैं। सूर्योदय के बाद, हरि वासर बीतने पर, और द्वादशी ख़त्म होने से पहले पारण कर लीजिए।

2027 की ख़ास एकादशी

  • निर्जला एकादशी, 14 जून: बिना पानी का व्रत। माना जाता है कि इस एक व्रत से साल की सभी एकादशी का फल मिलता है।
  • देवशयनी एकादशी, 14 जुलाई: चातुर्मास शुरू। इसके बाद शादी और गृह प्रवेश रुक जाते हैं।
  • देवउठनी एकादशी, 10 नवंबर: चातुर्मास ख़त्म। शादियाँ फिर शुरू।
  • मोक्षदा एकादशी, 9 दिसंबर: इसी दिन गीता जयंती है।

देवउठनी के बाद शादी की तारीख़ें विवाह मुहूर्त 2027 में हैं। महीने के बाक़ी व्रत प्रदोष व्रत 2027, अमावस्या 2027 और पूर्णिमा 2027 में देखिए।

अपनी कुंडली से मुहूर्त चाहिए? R P Pandey जी हर संदेश स्वयं पढ़ते हैं। व्हाट्सऐप पर अपनी बात भेजिए। कोई तय शुल्क नहीं है।

स्रोत: तिथि का समय हमारे अपने पंचांग इंजन से, जयपुर के सूर्योदय पर, लाहिरी अयनांश। तारीख़ों का मिलान दृक पंचांग की एकादशी 2027 सूची से किया गया है, सभी 25 तारीख़ें मिलती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

2027 में कितनी एकादशी हैं?
25। साल में सामान्यत: 24 होती हैं, पर 2027 में पौष कृष्ण एकादशी 3 जनवरी और 23 दिसंबर, दोनों को पड़ रही है।
निर्जला एकादशी 2027 कब है?
सोमवार 14 जून 2027 को। यह ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी है।
देवशयनी एकादशी 2027 कब है?
बुधवार 14 जुलाई 2027 को। इसी दिन से चातुर्मास शुरू होता है, जो 10 नवंबर को देवउठनी एकादशी तक रहेगा।
देवउठनी एकादशी 2027 कब है?
बुधवार 10 नवंबर 2027 को। इसके बाद शादियाँ फिर शुरू होती हैं।
क्या 2027 में अधिक मास है?
नहीं। 2027 में कोई अधिक मास नहीं है। पिछला अधिक मास 2026 में ज्येष्ठ का था।
एकादशीव्रतपंचांग

अपना प्रश्न इसी तरह समझना चाहते हैं?

आप अपना प्रश्न आर पी पांडे जी को व्हाट्सऐप पर रख सकते हैं। पहले देखा जाता है कि घटना प्रॉमिस है या नहीं, फिर समय।

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