पंचांग कैसे देखें: पुराने हिंदी पंचांग से शुभ मुहूर्त निकालना सीखिए
पंचांग पढ़ना बिल्कुल आसान भाषा में सीखिए: 5 अंग, घटी और पल का हिसाब, भद्रा, दिशाशूल, राहुकाल और चौघड़िया। दीवाली 2026 के असली उदाहरण के साथ।
दादी-नानी पंचांग खोलकर झट से बता देती थीं कि आज कौन सा काम करना अच्छा है। यह कोई जादू नहीं है। पंचांग एक तरह की डायरी है, जिसमें हर दिन की कुछ ख़ास बातें लिखी होती हैं। थोड़ा सा समझ लें, तो आप भी पंचांग पढ़ सकते हैं और अच्छा समय ख़ुद चुन सकते हैं। मुहूर्त असल में होता क्या है, यह पहले शुभ मुहूर्त क्या है में समझ लीजिए।

पंचांग क्या है
पंचांग का मतलब है पाँच अंग। हर दिन की पाँच बातें, जिन्हें देखकर पता चलता है कि दिन कैसा है। एक तरह से यह आसमान की रोज़ की रिपोर्ट है: आज चाँद कहाँ है, सूरज कहाँ है, और दोनों का मेल कैसा है।
पंचांग के 5 अंग
- तिथि: चाँद का दिन। अमावस्या के बाद चाँद रोज़ बढ़ता है, इसे शुक्ल पक्ष कहते हैं। पूर्णिमा के बाद चाँद घटता है, इसे कृष्ण पक्ष कहते हैं। हर पक्ष में 15 तिथियाँ होती हैं।
- वार: हफ़्ते का दिन, जैसे सोमवार या शुक्रवार। पंचांग में वार रात 12 बजे से नहीं, सूर्योदय से बदलता है।
- नक्षत्र: आसमान में तारों के 27 समूह हैं। चाँद रोज़ लगभग एक नक्षत्र आगे बढ़ता है।
- योग: सूरज और चाँद की जगह को जोड़कर बनता है। ये भी 27 होते हैं।
- करण: तिथि का आधा हिस्सा। एक करण का नाम विष्टि है, जिसे भद्रा कहते हैं।

पंचांग का पन्ना कैसे पढ़ें
छपे हुए पंचांग में हर दिन की एक लाइन होती है। उसमें बाएँ से दाएँ आमतौर पर ये बातें लिखी होती हैं:
| पंचांग में क्या लिखा है | इसका मतलब |
|---|---|
| तारीख़ और वार | कौन सा दिन है |
| तिथि और उसके आगे का समय | यह तिथि कब तक रहेगी, उसके बाद अगली तिथि शुरू |
| नक्षत्र और समय | चाँद इस नक्षत्र में कब तक है |
| योग और करण | ये भी अपने ख़त्म होने के समय के साथ |
| सूर्योदय और सूर्यास्त | दिन कब शुरू और कब ख़त्म |
| चंद्र राशि | चाँद आज किस राशि में है |
| व्रत और त्योहार | उस दिन का कोई ख़ास पर्व |
सबसे ज़रूरी बात: पंचांग में लिखा समय यह बताता है कि वह चीज़ कब ख़त्म होगी, शुरू कब होगी यह नहीं। जैसे "अष्टमी सुबह 10:52 तक" का मतलब है कि सुबह 10:52 तक अष्टमी है, उसके बाद नवमी शुरू हो जाएगी।
घटी और पल समझिए
पुराने पंचांग में समय घंटे और मिनट में नहीं, घटी और पल में लिखा होता है। घबराइए नहीं, हिसाब बहुत आसान है:
- 1 घटी = 24 मिनट
- 1 पल = 24 सेकंड
- 60 पल = 1 घटी
- ढाई घटी = 1 घंटा
घटी हमेशा सूर्योदय से गिनी जाती है। अगर पंचांग में लिखा है "अष्टमी 11/0", तो इसका मतलब है सूर्योदय के बाद 11 घटी और 0 पल तक अष्टमी है।
उदाहरण, दुर्गा अष्टमी 19 अक्टूबर 2026, जयपुर:
- 11 घटी × 24 मिनट = 264 मिनट, यानी 4 घंटे 24 मिनट
- जयपुर में उस दिन सूर्योदय सुबह 6:28 पर है
- 6:28 में 4 घंटे 24 मिनट जोड़िए, तो सुबह 10:52 तक अष्टमी है

शुभ मुहूर्त निकालने के 6 आसान कदम
- तिथि देखिए। नया काम शुरू करने के लिए चतुर्थी, नवमी और चतुर्दशी अच्छी नहीं मानी जातीं। इन्हें रिक्ता तिथि कहते हैं, यानी ख़ाली। अमावस्या पर भी नया काम शुरू नहीं करते, लक्ष्मी पूजन जैसे पर्व को छोड़कर।
- वार देखिए। सोमवार, बुधवार, गुरुवार और शुक्रवार ज़्यादातर कामों के लिए अच्छे माने जाते हैं।
- नक्षत्र देखिए। हर नक्षत्र का अपना स्वभाव है। पुष्य नक्षत्र सबसे शुभ माना जाता है, बस विवाह में इसे नहीं लेते। रोहिणी और तीनों उत्तरा नक्षत्र टिकने वाले कामों, जैसे घर की नींव, के लिए अच्छे हैं।
- भद्रा देखिए। जिस समय विष्टि करण हो, यानी भद्रा हो, उस समय शुभ काम शुरू नहीं करते।
- राहुकाल हटाइए। दिन के आठ हिस्सों में से एक हिस्सा, लगभग डेढ़ घंटा, राहुकाल होता है। हर वार को यह अलग समय पर आता है।
- अच्छी घड़ी चुनिए। बचे हुए समय में अमृत, शुभ या लाभ चौघड़िया में, या दोपहर के अभिजित मुहूर्त में काम शुरू कीजिए।
तीन बातें और: दिशाशूल, पंचक और भद्रा
दिशाशूल बताता है कि किस वार को किस दिशा में यात्रा शुरू नहीं करनी चाहिए:
| वार | इस दिशा में यात्रा न करें |
|---|---|
| सोमवार और शनिवार | पूर्व |
| मंगलवार और बुधवार | उत्तर |
| गुरुवार | दक्षिण |
| शुक्रवार और रविवार | पश्चिम |
पंचक: जब चाँद कुंभ और मीन राशि में होता है, यानी धनिष्ठा नक्षत्र के आख़िरी आधे हिस्से से रेवती तक, तो लगभग पाँच दिन पंचक कहलाते हैं। इन दिनों में घर की छत डालना, दक्षिण दिशा की यात्रा और लकड़ी इकट्ठा करने जैसे कुछ काम टाले जाते हैं।
भद्रा: विष्टि करण का दूसरा नाम। रक्षाबंधन और होलिका दहन का समय देखते वक़्त सबसे पहले भद्रा ही देखी जाती है।
एक असली उदाहरण: दीवाली 2026
अब पूरा तरीक़ा एक असली दिन पर लगाकर देखते हैं। दीवाली रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। जयपुर का पंचांग यह कहता है:
- तिथि: चतुर्दशी सुबह 11:28 तक, फिर अमावस्या। यानी शाम को अमावस्या है, जो लक्ष्मी पूजन के लिए ज़रूरी है।
- सूर्यास्त: शाम 5:39। सूर्यास्त के बाद के लगभग ढाई घंटे, यानी 6 घटी, प्रदोष काल कहलाते हैं: शाम 5:39 से 8:03 तक।
- स्थिर लग्न: शाम को वृषभ लग्न 6:04 से 8:00 तक है। स्थिर लग्न में की गई पूजा से लक्ष्मी जी घर में टिकती हैं, ऐसी मान्यता है।
- दोनों को मिलाइए: प्रदोष काल और वृषभ लग्न एक साथ शाम 6:04 से 8:00 तक हैं। यही जयपुर में लक्ष्मी पूजन का सबसे अच्छा समय है।
दिल्ली, अजमेर और दूसरे शहरों के समय, धनतेरस और अष्टमी के मुहूर्त के साथ, यहाँ देखिए: दीवाली 2026 लक्ष्मी पूजन मुहूर्त और अष्टमी के मुहूर्त।
ख़ुद करके देखिए
अपने शहर का आज का पंचांग, तिथि कब तक है, राहुकाल और दिन रात का चौघड़िया एक ही जगह मुफ़्त में देखिए: आज का पंचांग और शुभ मुहूर्त। तारीख़ बदलकर कल का या किसी त्योहार का पंचांग भी देख सकते हैं।
एक ज़रूरी बात
रोज़ के छोटे कामों के लिए ऊपर का तरीक़ा काफ़ी है। विवाह, गृह प्रवेश या नया व्यापार जैसे बड़े कामों में आपका अपना जन्म नक्षत्र और कुंडली भी देखी जाती है। ऐसे कामों के लिए किसी अनुभवी ज्योतिषी से अपना व्यक्तिगत मुहूर्त निकलवाइए।
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- पंचांग में 11/25 का क्या मतलब होता है?
- इसका मतलब है सूर्योदय के बाद 11 घटी और 25 पल। एक घटी 24 मिनट की और एक पल 24 सेकंड का होता है, तो 11/25 यानी सूर्योदय के लगभग 4 घंटे 34 मिनट बाद।
- पंचांग में दिन कब से शुरू होता है?
- पंचांग में दिन और वार सूर्योदय से शुरू होते हैं, रात 12 बजे से नहीं। इसलिए सूर्योदय के समय जो तिथि होती है, वही उस दिन की तिथि मानी जाती है।
- क्या हर शहर का पंचांग अलग होता है?
- तिथि और नक्षत्र जिस घड़ी बदलते हैं, वह पूरे भारत में एक ही होती है। पर सूर्योदय, सूर्यास्त, राहुकाल, चौघड़िया और लग्न हर शहर में अलग होते हैं, इसलिए मुहूर्त अपने शहर का ही देखना चाहिए।
- भद्रा में क्या नहीं करना चाहिए?
- भद्रा, यानी विष्टि करण के समय, विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार और रक्षाबंधन जैसे शुभ काम शुरू नहीं किए जाते। रोज़ के सामान्य काम करने में कोई रोक नहीं है।
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