॥ श्री गणेशाय नमः ॥

·6 min read·By R P Pandey

शुभ मुहूर्त क्या है और कैसे निकाला जाता है?

शुभ मुहूर्त का सीधा-सादा मतलब, पंचांग वाला पुराना तरीक़ा और KP ज्योतिष का नया तरीक़ा — आसान भाषा में, बिना भारी शब्दों के।

शादी की तारीख़ तय करनी हो, नई दुकान खोलनी हो, नए घर में जाना हो — घर का कोई बड़ा-बुज़ुर्ग ज़रूर कहता है: पहले अच्छा मुहूर्त निकलवा लो। पर मुहूर्त असल में होता क्या है? आइए बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं।

मुहूर्त का सीधा मतलब

मुहूर्त का मतलब है — कोई काम शुरू करने का चुना हुआ अच्छा समय।

ज्योतिष की मान्यता है कि जिस घड़ी कोई काम शुरू होता है, उस घड़ी के आकाश का असर पूरे काम पर पड़ता है। जैसे बीज बोने का मौसम सही हो तो फसल अच्छी होती है — वैसे ही शुरुआत की घड़ी अच्छी हो तो काम के फलने-फूलने की उम्मीद बढ़ जाती है।

ध्यान दीजिए — बात हमेशा शुरुआत की है। शादी में फेरों का समय, दुकान का पहला बोहनी-मुहूर्त, नए घर में पहला प्रवेश। काम कब ख़त्म हुआ, यह मुहूर्त नहीं देखता।

पुराना तरीक़ा: पंचांग से

सदियों से मुहूर्त पंचांग देखकर निकाला जाता रहा है। पंचांग यानी दिन का लेखा-जोखा, जिसके पाँच अंग होते हैं:

  1. तिथि — चाँद की घटती-बढ़ती कला से बना दिन
  2. वार — सोमवार, मंगलवार आदि
  3. नक्षत्र — चाँद उस दिन किस तारा-समूह में है
  4. योग — सूर्य और चंद्र की स्थिति से बनने वाला जोड़
  5. करण — तिथि का आधा भाग

पंडित जी इन पाँचों को देखकर, अशुभ घड़ियाँ (जैसे राहुकाल) हटाकर, दिन का शुभ समय बताते हैं। साथ में व्यक्ति का जन्म-नक्षत्र भी मिलाया जाता है — इसीलिए एक ही दिन किसी के लिए बहुत शुभ और किसी के लिए साधारण हो सकता है। पंचांग वाले मुहूर्त तारीख़ों की सूची जैसे होते हैं — "इस महीने विवाह के मुहूर्त: 5, 9, 21 तारीख़।"

नया तरीक़ा: KP पद्धति से

KP ज्योतिष (कृष्णमूर्ति पद्धति) मुहूर्त को थोड़ा अलग ढंग से देखती है। KP कहती है — सिर्फ़ तारीख़ नहीं, घड़ी और जगह भी देखो। तरीक़ा यह है:

  • जिस समय काम शुरू करना है, उस समय और उस जगह की कुंडली बनाई जाती है — बिल्कुल वैसे ही जैसे किसी बच्चे के जन्म की कुंडली बनती है। मानो उस घड़ी काम का "जन्म" हो रहा है।
  • फिर देखा जाता है कि उस कुंडली में काम से जुड़े भाव (घर) मज़बूत हैं या नहीं। जैसे विवाह के लिए 2, 7 और 11 नंबर के भाव देखे जाते हैं; नौकरी के लिए 2, 6, 10 और 11।
  • साथ ही यह भी देखा जाता है कि शुरू किया काम लंबा टिकेगा या नहीं — इसके लिए लग्न (पहला भाव) परखा जाता है।

इसीलिए KP का मुहूर्त कहता है: "22 तारीख़ को सुबह 9:35 से 9:45 के बीच शुरू कीजिए" — पूरा दिन शुभ नहीं, बल्कि उस दिन का एक ख़ास अनुकूल समय शुभ होता है। और वही समय दिल्ली में शुभ हो सकता है पर उसी पल मुंबई में नहीं — क्योंकि जगह बदलते ही लग्न बदल जाता है।

दोनों में फ़र्क़ एक लाइन में

पंचांग अच्छा दिन बताता है, KP उस दिन की अच्छी घड़ी बताता है। बहुत से परिवार दोनों का सहारा लेते हैं — पंचांग से तारीख़, और सटीक समय के लिए KP जैसी गणना।

मुहूर्त किन कामों के लिए देखा जाता है?

  • विवाह और सगाई
  • गृह प्रवेश, ज़मीन-मकान की ख़रीद
  • दुकान या व्यापार की शुरुआत
  • नई नौकरी का पहला दिन
  • बच्चे का एडमिशन
  • लंबी यात्रा की शुरुआत
  • सोच-समझकर तय किया गया ऑपरेशन

एक ज़रूरी बात

मुहूर्त कोई जादू नहीं है। अच्छा मुहूर्त मेहनत की जगह नहीं ले सकता — वह सिर्फ़ शुरुआत को अनुकूल बनाता है। अच्छा तरीक़ा यह है — शुभ दिन पंचांग से लीजिए, और सटीक घड़ी किसी अनुभवी ज्योतिषी से अपने शहर के हिसाब से निकलवाइए। और बड़े मौक़ों पर — ख़ासकर विवाह में — कुंडली मिलान भी उतना ही ज़रूरी है जितना मुहूर्त।

Read this in English: What is a Shubh Muhurat and how is it chosen?

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या मुहूर्त हर शहर में एक जैसा होता है?
पंचांग की तिथि-नक्षत्र लगभग पूरे भारत में एक जैसे रहते हैं, पर KP पद्धति में जगह बदलते ही लग्न बदल जाता है — इसलिए सटीक मुहूर्त अपने शहर के हिसाब से देखना चाहिए।
अगर मुहूर्त पर काम शुरू न कर पाएँ तो?
घबराने की बात नहीं। मुहूर्त शुरुआत को अनुकूल बनाता है, पर काम की असली ताक़त आपकी मेहनत और तैयारी है। अगली अच्छी घड़ी देखकर शुरुआत कर दीजिए।
क्या रात में भी शुभ मुहूर्त हो सकता है?
हाँ। शुभ घड़ी दिन या रात किसी भी समय बन सकती है — यह उस क्षण के लग्न और ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है, धूप-छाँव पर नहीं।
विवाह का मुहूर्त कौन-से भाव देखकर निकलता है?
KP पद्धति में विवाह के लिए मुख्य रूप से 2 (परिवार), 7 (जीवनसाथी) और 11 (इच्छा-पूर्ति) नंबर के भाव देखे जाते हैं, और साथ में लग्न की मज़बूती।
मुहूर्तKP ज्योतिषपंचांग

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