॥ श्री गणेशाय नमः ॥

·8 min read·By R P Pandey

शुभ मुहूर्त क्या है और कैसे निकाला जाता है?

शुभ मुहूर्त क्या है और कैसे निकालें, साथ में दीवाली 2026 लक्ष्मी पूजन, धनतेरस, दुर्गा अष्टमी और अहोई अष्टमी के मुहूर्त। पंचांग, राहुकाल और चौघड़िया सरल हिंदी में।

शादी की तारीख़ तय करनी हो, नई दुकान खोलनी हो, नए घर में जाना हो — घर का कोई बड़ा-बुज़ुर्ग ज़रूर कहता है: पहले अच्छा मुहूर्त निकलवा लो। पर मुहूर्त असल में होता क्या है? आइए बिल्कुल आसान भाषा में समझते हैं।

2026 के त्योहारों के शुभ मुहूर्त

नीचे के सभी समय भारतीय मानक समय में हैं और जयपुर, दिल्ली और अजमेर के सूर्योदय और सूर्यास्त से निकाले गए हैं। आपके शहर में कुछ मिनट का फ़र्क़ हो सकता है। अपने शहर का समय देखने के लिए आज का पंचांग और शुभ मुहूर्त खोलिए।

दीपावली 2026: लक्ष्मी पूजन मुहूर्त

दीपावली रविवार, 8 नवंबर 2026 को है। कार्तिक अमावस्या 8 नवंबर सुबह 11:28 से 9 नवंबर दोपहर 12:32 तक है। लक्ष्मी पूजन उस समय सबसे अच्छा माना जाता है जब शाम का प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न एक साथ हों। स्थिर लग्न में पूजा करने से लक्ष्मी जी घर में टिकती हैं, ऐसी मान्यता है।

शहरलक्ष्मी पूजन मुहूर्तप्रदोष काल
जयपुरशाम 6:04 से 8:00शाम 5:39 से 8:03
दिल्लीशाम 5:55 से 7:51शाम 5:31 से 7:55
अजमेरशाम 6:09 से 8:05शाम 5:44 से 8:08
  • निशीथ काल, जयपुर: रात 11:46 से 12:34। रात की विशेष साधना करने वाले यह समय लेते हैं।
  • धनतेरस, शुक्रवार 6 नवंबर: त्रयोदशी शाम को रहेगी। पूजन और दीपदान का समय जयपुर में शाम 6:11 से 8:04, दिल्ली में शाम 6:03 से 7:56, अजमेर में शाम 6:17 से 8:10।
दीपावली 2026 लक्ष्मी पूजन मुहूर्त: जयपुर, दिल्ली और अजमेर का समय
दीपावली 2026 लक्ष्मी पूजन मुहूर्त: जयपुर, दिल्ली और अजमेर का समय

दुर्गा अष्टमी 2026: कन्या पूजन मुहूर्त

महा अष्टमी सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को है। अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर सुबह 8:29 से 19 अक्टूबर सुबह 10:52 तक है। 18 अक्टूबर को सूर्योदय के समय सप्तमी थी, इसलिए अष्टमी का व्रत और कन्या पूजन 19 अक्टूबर को होगा। कन्या पूजन अष्टमी ख़त्म होने से पहले, यानी सुबह 10:52 से पहले कर लीजिए।

जयपुर, 19 अक्टूबरसमय
कन्या पूजन, अमृत चौघड़ियासुबह 6:28 से 7:54
कन्या पूजन, शुभ चौघड़ियासुबह 9:20 से 10:45
संधि पूजासुबह 10:28 से 11:16
राहुकाल, इसमें पूजन शुरू न करेंसुबह 7:54 से 9:20

अहोई अष्टमी 2026

अहोई अष्टमी रविवार, 1 नवंबर 2026 को है। अष्टमी 1 नवंबर दोपहर 2:52 से 2 नवंबर दोपहर 1:11 तक है। माताएँ दिन भर व्रत रखकर शाम को अहोई माता की पूजा करती हैं और तारे देखकर अर्घ्य देती हैं। जयपुर में सूर्यास्त शाम 5:44 पर है, उसके बाद पूजा और तारों को अर्घ्य दीजिए। जो चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं, उनके लिए जयपुर में चंद्रोदय रात 11:45 पर है। इस दिन रविवार और पुष्य नक्षत्र साथ होने से रवि पुष्य योग भी है, जो ख़रीदारी के लिए अच्छा माना जाता है।

अष्टमी 2026: दुर्गा अष्टमी और अहोई अष्टमी का पूजन मुहूर्त
अष्टमी 2026: दुर्गा अष्टमी और अहोई अष्टमी का पूजन मुहूर्त

पंचांग पढ़कर ये समय ख़ुद कैसे निकालें, यह पंचांग देखकर शुभ मुहूर्त कैसे निकालें में बिल्कुल आसान भाषा में समझाया है।

मुहूर्त का सीधा मतलब

मुहूर्त का मतलब है — कोई काम शुरू करने का चुना हुआ अच्छा समय।

ज्योतिष की मान्यता है कि जिस घड़ी कोई काम शुरू होता है, उस घड़ी के आकाश का असर पूरे काम पर पड़ता है। जैसे बीज बोने का मौसम सही हो तो फसल अच्छी होती है — वैसे ही शुरुआत की घड़ी अच्छी हो तो काम के फलने-फूलने की उम्मीद बढ़ जाती है।

ध्यान दीजिए — बात हमेशा शुरुआत की है। शादी में फेरों का समय, दुकान का पहला बोहनी-मुहूर्त, नए घर में पहला प्रवेश। काम कब ख़त्म हुआ, यह मुहूर्त नहीं देखता।

पुराना तरीक़ा: पंचांग से

सदियों से मुहूर्त पंचांग देखकर निकाला जाता रहा है। पंचांग यानी दिन का लेखा-जोखा, जिसके पाँच अंग होते हैं:

  1. तिथि — चाँद की घटती-बढ़ती कला से बना दिन
  2. वार — सोमवार, मंगलवार आदि
  3. नक्षत्र — चाँद उस दिन किस तारा-समूह में है
  4. योग — सूर्य और चंद्र की स्थिति से बनने वाला जोड़
  5. करण — तिथि का आधा भाग

पंडित जी इन पाँचों को देखकर, अशुभ घड़ियाँ (जैसे राहुकाल) हटाकर, दिन का शुभ समय बताते हैं। साथ में व्यक्ति का जन्म-नक्षत्र भी मिलाया जाता है — इसीलिए एक ही दिन किसी के लिए बहुत शुभ और किसी के लिए साधारण हो सकता है। पंचांग वाले मुहूर्त तारीख़ों की सूची जैसे होते हैं — "इस महीने विवाह के मुहूर्त: 5, 9, 21 तारीख़।"

मेज़ पर खुला पंचांग, पास में दीपक और गेंदे के फूल
मेज़ पर खुला पंचांग, पास में दीपक और गेंदे के फूल

पंचांग के पाँच अंग, एक नज़र में

अंगयह क्या हैक्या अच्छा माना जाता हैकिससे बचते हैं
तिथिसूर्य और चंद्र की दूरी से बना चंद्र-दिनशुक्ल पक्ष की द्वितीया, तृतीया, पंचमी, सप्तमी, दशमी, एकादशी, त्रयोदशीरिक्ता तिथियाँ (चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी) और अमावस्या
वारसप्ताह का दिनसोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवारमंगलवार और शनिवार कई शुभ कामों में टाले जाते हैं
नक्षत्रचंद्रमा उस दिन जिस नक्षत्र में हैकाम के स्वभाव से मेल खाता नक्षत्र; टिकाऊ कामों के लिए रोहिणी और तीनों उत्तराअपने जन्म-नक्षत्र से प्रतिकूल पड़ने वाला नक्षत्र
योगसूर्य और चंद्र की स्थिति के जोड़ से बने 27 योगसिद्धि, शुभ, अमृत जैसे योगव्यतीपात और वैधृति
करणतिथि का आधा भागचर करण (बव, बालव, कौलव, तैतिल, गर, वणिज)विष्टि करण, जिसे भद्रा कहते हैं

खुद मुहूर्त कैसे देखें: 5 आसान कदम

  1. पंचांग खोलिए और तारीख़ चुनिए। जिस हफ़्ते काम करना है, उसके दिन सामने रखिए।
  2. तिथि देखिए। चतुर्थी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या वाले दिन हटा दीजिए।
  3. नक्षत्र और योग देखिए। व्यतीपात या वैधृति योग वाला दिन और भद्रा का समय छोड़ दीजिए।
  4. दिन की अशुभ घड़ियाँ हटाइए। राहुकाल में नया शुभ काम शुरू नहीं किया जाता।
  5. बचे समय में अच्छी घड़ी चुनिए। अभिजित मुहूर्त या शुभ चौघड़िया में काम शुरू कीजिए।

शादी, गृह प्रवेश जैसे बड़े कामों में अपना जन्म-नक्षत्र भी मिलाया जाता है, इसलिए वहाँ ज्योतिषी से व्यक्तिगत मुहूर्त निकलवाना ठीक रहता है।

राहुकाल क्या है

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। इनमें से एक भाग, लगभग डेढ़ घंटा, राहुकाल कहलाता है। यह हर वार को अलग समय पर पड़ता है। इसमें नया शुभ काम शुरू करने से बचा जाता है।

अभिजित मुहूर्त क्या है

दोपहर के आसपास का लगभग 48 मिनट का समय अभिजित मुहूर्त कहलाता है। जब कोई और अच्छा मुहूर्त न मिले, तो इसी में काम शुरू किया जाता है। बुधवार को इसे नहीं लिया जाता।

चौघड़िया क्या है

दिन को आठ और रात को आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग एक चौघड़िया है। अमृत, शुभ और लाभ अच्छे माने जाते हैं, चर सामान्य है, और रोग, काल, उद्वेग टाले जाते हैं।

एक असली दिन का उदाहरण

मान लीजिए आपको 11 अक्टूबर 2026, रविवार को जयपुर में कोई काम शुरू करना है। उस दिन का पंचांग यह है:

  • तिथि: शुक्ल प्रतिपदा
  • नक्षत्र: चित्रा
  • योग: वैधृति
  • करण: किंस्तुघ्न
  • राहुकाल: शाम 4:35 से 6:02
  • अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:50 से दोपहर 12:36

तिथि ठीक है, पर योग वैधृति है, जिसे टाला जाता है। इसलिए विवाह या गृह प्रवेश जैसे बड़े काम के लिए यह दिन नहीं चुना जाएगा। कोई छोटा काम उसी दिन करना ही हो, तो अभिजित मुहूर्त में शुरू कीजिए और राहुकाल छोड़ दीजिए।

नया तरीक़ा: KP पद्धति से

KP ज्योतिष (कृष्णमूर्ति पद्धति) मुहूर्त को थोड़ा अलग ढंग से देखती है। KP कहती है — सिर्फ़ तारीख़ नहीं, घड़ी और जगह भी देखो। तरीक़ा यह है:

  • जिस समय काम शुरू करना है, उस समय और उस जगह की कुंडली बनाई जाती है — बिल्कुल वैसे ही जैसे किसी बच्चे के जन्म की कुंडली बनती है। मानो उस घड़ी काम का "जन्म" हो रहा है।
  • फिर देखा जाता है कि उस कुंडली में काम से जुड़े भाव (घर) मज़बूत हैं या नहीं। जैसे विवाह के लिए 2, 7 और 11 नंबर के भाव देखे जाते हैं; नौकरी के लिए 2, 6, 10 और 11।
  • साथ ही यह भी देखा जाता है कि शुरू किया काम लंबा टिकेगा या नहीं — इसके लिए लग्न (पहला भाव) परखा जाता है।

इसीलिए KP का मुहूर्त कहता है: "22 तारीख़ को सुबह 9:35 से 9:45 के बीच शुरू कीजिए" — पूरा दिन शुभ नहीं, बल्कि उस दिन का एक ख़ास अनुकूल समय शुभ होता है। और वही समय दिल्ली में शुभ हो सकता है पर उसी पल मुंबई में नहीं — क्योंकि जगह बदलते ही लग्न बदल जाता है।

दोनों में फ़र्क़ एक लाइन में

पंचांग अच्छा दिन बताता है, KP उस दिन की अच्छी घड़ी बताता है। बहुत से परिवार दोनों का सहारा लेते हैं — पंचांग से तारीख़, और सटीक समय के लिए KP जैसी गणना।

मुहूर्त किन कामों के लिए देखा जाता है?

  • विवाह और सगाई
  • गृह प्रवेश, ज़मीन-मकान की ख़रीद
  • दुकान या व्यापार की शुरुआत
  • नई नौकरी का पहला दिन
  • बच्चे का एडमिशन
  • लंबी यात्रा की शुरुआत
  • सोच-समझकर तय किया गया ऑपरेशन

एक ज़रूरी बात

मुहूर्त कोई जादू नहीं है। अच्छा मुहूर्त मेहनत की जगह नहीं ले सकता — वह सिर्फ़ शुरुआत को अनुकूल बनाता है। अच्छा तरीक़ा यह है — शुभ दिन पंचांग से लीजिए, और सटीक घड़ी किसी अनुभवी ज्योतिषी से अपने शहर के हिसाब से निकलवाइए। और बड़े मौक़ों पर — ख़ासकर विवाह में — कुंडली मिलान भी उतना ही ज़रूरी है जितना मुहूर्त।

Read this in English: What is a Shubh Muhurat and how is it chosen?

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

दीवाली 2026 में लक्ष्मी पूजन का शुभ मुहूर्त क्या है?
दीपावली रविवार 8 नवंबर 2026 को है। प्रदोष काल और स्थिर वृषभ लग्न के हिसाब से लक्ष्मी पूजन जयपुर में शाम 6:04 से 8:00, दिल्ली में शाम 5:55 से 7:51 और अजमेर में शाम 6:09 से 8:05 तक सबसे अच्छा है।
दुर्गा अष्टमी और अहोई अष्टमी 2026 कब है?
दुर्गा अष्टमी सोमवार 19 अक्टूबर 2026 को है, कन्या पूजन सुबह 10:52 से पहले कर लीजिए। अहोई अष्टमी रविवार 1 नवंबर 2026 को है, पूजा शाम को सूर्यास्त के बाद तारे देखकर होती है।
क्या मुहूर्त हर शहर में एक जैसा होता है?
पंचांग की तिथि-नक्षत्र लगभग पूरे भारत में एक जैसे रहते हैं, पर KP पद्धति में जगह बदलते ही लग्न बदल जाता है — इसलिए सटीक मुहूर्त अपने शहर के हिसाब से देखना चाहिए।
अगर मुहूर्त पर काम शुरू न कर पाएँ तो?
घबराने की बात नहीं। मुहूर्त शुरुआत को अनुकूल बनाता है, पर काम की असली ताक़त आपकी मेहनत और तैयारी है। अगली अच्छी घड़ी देखकर शुरुआत कर दीजिए।
क्या रात में भी शुभ मुहूर्त हो सकता है?
हाँ। शुभ घड़ी दिन या रात किसी भी समय बन सकती है — यह उस क्षण के लग्न और ग्रहों की स्थिति पर निर्भर करता है, धूप-छाँव पर नहीं।
विवाह का मुहूर्त कौन-से भाव देखकर निकलता है?
KP पद्धति में विवाह के लिए मुख्य रूप से 2 (परिवार), 7 (जीवनसाथी) और 11 (इच्छा-पूर्ति) नंबर के भाव देखे जाते हैं, और साथ में लग्न की मज़बूती।
मुहूर्तKP ज्योतिषपंचांग

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