12 राशियाँ और उनके स्वामी ग्रह — पूरी सूची
सभी 12 राशियों और उनके स्वामी ग्रह की पूरी तालिका — मेष–मंगल, वृषभ–शुक्र, मिथुन–बुध … मीन–गुरु तक। वैदिक और केपी ज्योतिष में हर राशि का स्वामी, सरल हिंदी में।
वैदिक और केपी ज्योतिष में हर राशि का एक स्वामी ग्रह होता है, जिसे राशि स्वामी कहते हैं। राशि स्वामी कुंडली का एक बहुत ज़रूरी विचार है — किसी राशि के स्वामी की स्थिति और बल से ज्योतिषी उस राशि से जुड़ी बातों के बारे में बहुत कुछ जान लेते हैं।
राशि स्वामी क्या है
एक राशि राशिचक्र का 30° का हिस्सा है — कुल बारह, मेष से मीन तक। हर एक का स्वामी एक ग्रह होता है। जैसे, यदि कोई भाव मेष में है तो उसका स्वामी मंगल है; वृषभ में है तो स्वामी शुक्र है।
सूर्य और चंद्र एक-एक राशि के स्वामी हैं, जबकि मंगल, बुध, गुरु, शुक्र और शनि दो-दो राशियों के स्वामी हैं। (राहु और केतु पारंपरिक रूप से राशि स्वामी नहीं माने जाते।)
सभी 12 राशियाँ और उनके स्वामी
| राशि | अंग्रेज़ी | चिन्ह | स्वामी ग्रह |
|---|---|---|---|
| मेष | Aries | मेढ़ा | मंगल |
| वृषभ | Taurus | बैल | शुक्र |
| मिथुन | Gemini | जुड़वाँ | बुध |
| कर्क | Cancer | केकड़ा | चंद्र |
| सिंह | Leo | शेर | सूर्य |
| कन्या | Virgo | कन्या | बुध |
| तुला | Libra | तराज़ू | शुक्र |
| वृश्चिक | Scorpio | बिच्छू | मंगल |
| धनु | Sagittarius | धनुर्धर | गुरु |
| मकर | Capricorn | मगर | शनि |
| कुंभ | Aquarius | घड़ा | शनि |
| मीन | Pisces | मछली | गुरु |
आपकी अपनी कुंडली में आपका राशि स्वामी क्या कर रहा है? तालिका बताती है कि स्वामी कौन है। आपकी कुंडली बताती है कि वह कहाँ बैठा है और कब असर दिखाता है। आर पी पांडे जी से व्हाट्सऐप पर पूछें
इसका उपयोग आपके पाठ में
राशि का स्वामी जानना तो बस शुरुआत है। असली पाठ में ज्योतिषी देखते हैं कि स्वामी कहाँ बैठा है, किस भाव में है, और कितना बलवान है। उसकी दशा और गोचर से घटना का समय पता चलता है। इसी तरह एक सरल सूची एक सटीक भविष्यवाणी बन जाती है।
Read this in English: The 12 Rashis and Their Lords
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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
- किस राशि का स्वामी कौन-सा ग्रह है?
- मेष और वृश्चिक के स्वामी मंगल; वृषभ और तुला के शुक्र; मिथुन और कन्या के बुध; कर्क का चंद्रमा; सिंह का सूर्य; धनु और मीन के गुरु; मकर और कुंभ के शनि। राहु-केतु किसी राशि के स्वामी नहीं हैं — वे जिस राशि में बैठते हैं, उसके स्वामी के अनुसार फल देते हैं। ऊपर की तालिका में सभी 12 राशियाँ एक साथ दी गई हैं।
- क्या 12वीं राशि का स्वामी और 12वें भाव का स्वामी एक ही बात है?
- नहीं — यहीं सबसे ज़्यादा भ्रम होता है। 12वीं राशि यानी मीन, जिसका स्वामी हमेशा गुरु है। पर 12वें भाव का स्वामी हर कुंडली में अलग होता है — आपके लग्न के हिसाब से 12वें भाव में जो राशि पड़ती है, उसका स्वामी। जब कोई 'आपका 12वाँ स्वामी' कहे, तो लगभग हमेशा भाव-स्वामी की बात हो रही होती है।
- राशि स्वामी जानने से क्या फ़ायदा है?
- राशि स्वामी वह ग्रह है जो उस राशि से जुड़े हर वादे का जवाबदेह है। वह आपकी कुंडली में कितना मज़बूत है, किस भाव में बैठा है और उसकी दशा कब चल रही है — इसी से तय होता है कि फल कब और कैसा मिलेगा। एक ही राशि के दो लोगों के फल इसीलिए अलग होते हैं।
अपना प्रश्न इसी तरह समझना चाहते हैं?
आप अपना प्रश्न आर पी पांडे जी को व्हाट्सऐप पर रख सकते हैं। पहले देखा जाता है कि घटना प्रॉमिस है या नहीं, फिर समय।
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