॥ श्री गणेशाय नमः ॥

·6 min read·By R P Pandey

रसोई का वास्तु: जहाँ अग्नि और जल शांति से रहें

रसोई के लिए सरल वास्तु मार्गदर्शन — सबसे अच्छी दिशा, गैस चूल्हा और सिंक कहाँ रखें, पकाते समय किस दिशा में मुँह हो, और रसोई आदर्श स्थान पर न हो तो कोमल उपाय।

रसोई वह स्थान है जहाँ घर की अग्नि रहती है — और अग्नि शक्तिशाली होती है। इसीलिए वास्तु रसोई पर ध्यान से विचार करता है। पर हमेशा की तरह, नियम जितने लगते हैं उससे सरल हैं, और आदर्श न होने वाली रसोई भी बिना कुछ तोड़े सहज संतुलित हो जाती है।

रसोई अग्नि और जल की बात क्यों है

रसोई में पाँच तत्वों में से दो ऐसे होते हैं जो स्वाभाविक रूप से नहीं मिलते — अग्नि (चूल्हा) और जल (सिंक, पीने का पानी)। रसोई के लिए वास्तु का पूरा उद्देश्य है — अग्नि को उसका सही स्थान देना और जल को थोड़ा अलग रखना — ताकि दोनों शांति से रहें। यह समझ आ जाए तो रसोई का हर नियम स्पष्ट हो जाता है।

रसोई के लिए सबसे अच्छी दिशा

अग्नि का स्थान दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) है — अग्निदेव की दिशा। इसलिए आदर्श रसोई घर के दक्षिण-पूर्व कोने में होती है, और पकाना वहीं होता है। पूर्व अच्छा दूसरा विकल्प है, क्योंकि वह उगते सूर्य की ओर है।

चूल्हा और सिंक कहाँ हों

रसोई का वास्तु नक्शा: चूल्हा दक्षिण-पूर्व कोने में, सिंक उत्तर में, भारी सामान दक्षिण और पश्चिम में
रसोई का वास्तु नक्शा: चूल्हा दक्षिण-पूर्व कोने में, सिंक उत्तर में, भारी सामान दक्षिण और पश्चिम में

इस नक्शे में चूल्हा दक्षिण-पूर्व कोने में, पूर्व की दीवार पर है, इसलिए पकाने वाले का मुँह पूर्व की ओर रहता है। सिंक उत्तर की दीवार पर है, आग से दूर। अनाज और भारी बर्तनों की अलमारियाँ दक्षिण और पश्चिम में हैं।

आपकी रसोई चाहे किसी भी दिशा में हो, उसके भीतर की व्यवस्था रसोई की अपनी दिशा से अधिक मायने रखती है:

  • गैस चूल्हा — दक्षिण-पूर्व। चूल्हा रसोई के दक्षिण-पूर्व कोने की ओर रखें। यह सबसे उपयोगी रसोई-सुझाव है।
  • पकाते समय पूर्व की ओर मुँह। पकाने वाला आदर्श रूप से पूर्व की ओर मुँह करे; उत्तर अगला विकल्प।
  • सिंक और पीने का पानी — उत्तर या उत्तर-पूर्व। पानी उत्तर की ओर, अग्नि से थोड़ा दूर रखें।
  • अग्नि और जल को अलग रखें। चूल्हा और सिंक एकदम पास-पास न रखें। जगह की मजबूरी हो तो बीच में थोड़ा अंतर या नीचा विभाजक रखें।

सरल, सकारात्मक रसोई सुझाव

  • रसोई को साफ़, उजला और हवादार रखें — ताज़ी रसोई सुखी रसोई होती है।
  • गर्म, प्रसन्न रंग — पीला, नारंगी, क्रीम — अग्नि तत्व के अनुकूल हैं।
  • अनाज और भारी सामान रसोई के दक्षिण या पश्चिम की ओर रखें।
  • टपकता नल ठीक कराएँ — बहकर जाता पानी सचमुच बर्बादी है, और परंपरा में घर की समृद्धि पर एक छोटा रिसाव भी।

"मेरी रसोई गलत कोने में है — अब क्या?"

बहुत कम रसोई ठीक दक्षिण-पूर्व में होती हैं, फिर भी घर सुख से चलते हैं। यदि आपकी रसोई उत्तर-पूर्व, उत्तर-पश्चिम या किसी और जगह है, तो इसे तोड़ने या हटाने की ज़रूरत नहीं। बस भीतर के नियम अपनाएँ — चूल्हा कमरे के दक्षिण-पूर्व कोने में, पानी उत्तर की ओर, साफ़ और उजला रखें — कोई भी असंतुलन कोमलता से शांत हो जाता है। पूरी सरल उपाय-सूची यहाँ है — बिना तोड़-फोड़ के वास्तु उपाय।

आर पी पांडे जी आपकी रसोई की दिशा और बनावट देखकर बताएँगे कि सबसे कम बदलाव में सबसे ज़्यादा लाभ कैसे मिले — कभी कोई महँगा पुनर्निर्माण नहीं।

Read this in English: Vastu for the kitchen

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रसोई के लिए सबसे अच्छी दिशा कौन-सी है?
दक्षिण-पूर्व (आग्नेय कोण) आदर्श है, क्योंकि यह अग्नि की स्वाभाविक दिशा है। यदि रसोई कहीं और है, तो बस गैस चूल्हा उस रसोई के दक्षिण-पूर्व कोने में रखें और पानी उत्तर या उत्तर-पूर्व की ओर रखें।
पकाते समय किस दिशा में मुँह होना चाहिए?
पकाते समय पूर्व की ओर मुँह सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि यह व्यक्ति को उगते सूर्य से जोड़ता है। यदि यह संभव न हो, तो उत्तर की ओर मुँह अगला विकल्प है।
रसोई में चूल्हा और सिंक कहाँ हों?
गैस चूल्हा दक्षिण-पूर्व की ओर और सिंक व पीने का पानी उत्तर या उत्तर-पूर्व की ओर रखें — अग्नि और जल थोड़ा अलग, एकदम पास-पास नहीं। यदि पास रखना ही पड़े, तो बीच में थोड़ा अंतर या एक छोटा विभाजक मदद करता है।
मेरी रसोई उत्तर-पूर्व में है — क्या यह समस्या है?
उत्तर-पूर्व को आदर्श रूप से हल्का और जल-प्रधान रखते हैं, इसलिए वहाँ रसोई पूर्ण नहीं — पर यह कोई विपत्ति नहीं और इसे तोड़ने की ज़रूरत नहीं। उस रसोई के दक्षिण-पूर्व कोने में चूल्हा रखें, स्थान साफ़ व उजला रखें, यह ठीक चलेगी।
वास्तुरसोईघर

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