॥ श्री गणेशाय नमः ॥

·7 min read·By R P Pandey

घर का वास्तु — कौन-सा कमरा किस दिशा में

घर के हर हिस्से के लिए सबसे अच्छी दिशा का सरल और सकारात्मक वास्तु मार्गदर्शन — मुख्य द्वार, रसोई, शयनकक्ष, पूजाघर, जल और भंडार — और जब कोई कमरा सही दिशा में न हो तो सरल उपाय।

एक बार यह समझ आ जाए कि वास्तु का अर्थ है पाँच तत्वों में से हर एक को उसके स्वाभाविक स्थान पर रखना (देखें: वास्तु शास्त्र क्या है?), तो कमरे-दर-कमरे के नियम रटने की सूची नहीं रह जाते — वे समझ में आने लगते हैं। यहाँ है आपका घर, हिस्सा-दर-हिस्सा — हर नियम के पीछे का कारण, और जब कमरा सही दिशा में न हो तो एक कोमल उपाय।

मुख्य द्वार

मुख्य द्वार से ऊर्जा, प्रकाश और अवसर घर में आते हैं। उत्तर, पूर्व और उत्तर-पूर्व (ईशान) इसके लिए सबसे शुभ माने जाते हैं, क्योंकि ये ताज़ी सुबह की धूप की ओर खुलते हैं। किसी और दिशा में द्वार कोई विपत्ति नहीं — बहुत से सुखी घरों के द्वार दक्षिण या पश्चिम में होते हैं। द्वार को साफ़, प्रकाशमय और खुला रखें, घंटी चालू हो और नामपट्ट व्यवस्थित हो — यह अपना काम अच्छे से करेगा।

रसोई

अग्नि का स्थान दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) है, इसलिए आदर्श रसोई वहीं होती है, और पकाने वाला पूर्व की ओर मुँह करके खड़ा हो। यदि रसोई कहीं और है, तो सरल नियम यही है — गैस चूल्हा रसोई के दक्षिण-पूर्व कोने में रखें, और पीने का पानी व सिंक उत्तर या उत्तर-पूर्व की ओर — अग्नि और जल को थोड़ा अलग रखें।

मुख्य शयनकक्ष

पृथ्वी — भार और स्थिरता — का स्थान दक्षिण-पश्चिम है, इसलिए यह मुख्य शयनकक्ष और घर के सबसे भारी फ़र्नीचर के लिए सर्वोत्तम है। सिर दक्षिण या पूर्व की ओर करके सोएँ, नींद गहरी रहती है। बच्चों का कमरा पश्चिम या उत्तर-पश्चिम में आराम से बैठता है।

पूजाघर

उत्तर-पूर्व (ईशान) सबसे हल्का, पवित्र और शांत कोना है — जल और शांति की दिशा — इसलिए यह पूजाघर या मंदिर का पारंपरिक स्थान है। इसे साफ़ और खुला रखें। पूजा करते समय पूर्व या उत्तर की ओर मुँह आदर्श है।

जल — टंकी, फ़िल्टर, बोरिंग

जल का स्थान उत्तर-पूर्व है। भूमिगत जल (बोरिंग, टंकी) और पीने के पानी का फ़िल्टर उत्तर या उत्तर-पूर्व की ओर सबसे अच्छे रहते हैं। भारी ऊपरी टंकी, भार होने के कारण, दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम की ओर बेहतर बैठती है।

भारी भंडार और घर का मध्य

अपनी सबसे भारी चीज़ें — अलमारी, अटारी, भंडार — दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम में रखें, इससे घर को स्थिर "पीठ" मिलती है। और घर के मध्य (ब्रह्मस्थान) को खुला व हल्का रखें — कोई भारी फ़र्नीचर नहीं, कोई ढेर नहीं, हो सके तो थोड़ी खाली जगह। खुला ब्रह्मस्थान वास्तु के सबसे सरल और शक्तिशाली आशीर्वादों में से एक है।

पढ़ाई और काम

एकाग्रता के लिए पढ़ाई या काम की मेज़ पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम में हो, और व्यक्ति का मुँह पूर्व या उत्तर की ओर — मन ताज़ा और स्थिर रहता है।

"मेरा कमरा सही दिशा में नहीं है — अब क्या करूँ?"

यह सबसे ज़रूरी हिस्सा है, ध्यान से पढ़िए — सही दिशा न होना कोई डरने की बात नहीं। बहुत कम घर पूरी तरह किताबी-परिपूर्ण होते हैं, फिर भी वे सुख से चलते हैं। जहाँ कमरा आदर्श न हो, वहाँ उपाय लगभग हमेशा कोमल होता है — प्रकाश, रंग, स्थान और सफ़ाई — कभी हथौड़ा नहीं। पूरी सरल उपाय-सूची यहाँ है — बिना तोड़-फोड़ के वास्तु उपाय

यदि आप अपना घर जँचवाना चाहें, तो आर पी पांडे जी आपकी दिशाएँ देखकर आपको छोटे बदलावों की एक छोटी, शांत सूची देंगे — सबसे कम काम में सबसे ज़्यादा लाभ, और कुछ भी डर के आधार पर नहीं।

Read this in English: Vastu for your home, room by room

आपका कोई प्रश्न है? आर पी पांडे जी हर संदेश स्वयं पढ़ते हैं। व्हाट्सऐप पर अपना प्रश्न भेजें — कोई तय शुल्क नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्य शयनकक्ष के लिए सबसे अच्छी दिशा कौन-सी है?
दक्षिण-पश्चिम, पृथ्वी और स्थिरता की दिशा, मुख्य शयनकक्ष और सबसे भारी फ़र्नीचर के लिए आदर्श है। गहरी नींद के लिए सिर दक्षिण या पूर्व की ओर करके सोएँ। बच्चों का कमरा पश्चिम या उत्तर-पश्चिम में अच्छा बैठता है।
घर में पूजाघर कहाँ होना चाहिए?
उत्तर-पूर्व (ईशान) — सबसे हल्का, पवित्र, शांत कोना — पूजाघर या मंदिर का पारंपरिक स्थान है। इसे साफ़ और खुला रखें, और पूजा करते समय पूर्व या उत्तर की ओर मुँह करें।
घर के मध्य में क्या होना चाहिए?
घर के मध्य (ब्रह्मस्थान) को खुला और हल्का रखें — कोई भारी फ़र्नीचर नहीं, कोई ढेर नहीं, हो सके तो थोड़ी खाली जगह। खुला ब्रह्मस्थान वास्तु के सबसे सरल और शक्तिशाली आशीर्वादों में से एक है।
यदि कोई कमरा आदर्श दिशा में न हो तो?
यह डरने की बात नहीं। बहुत कम घर पूरी तरह किताबी-परिपूर्ण होते हैं, फिर भी सुख से चलते हैं। जहाँ कमरा आदर्श न हो, वहाँ कोमल उपाय — प्रकाश, रंग, स्थान, सफ़ाई — बिना कुछ तोड़े उसे संतुलित कर देते हैं।
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